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Bheed me saphalta kuchh vyaktiyo ko hee kyon/Why should some people succeed in the crowd. लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पढ़ाई में मन क्यों नहीं लगता है?

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  पढ़ाई में मन क्यों नहीं लगता है? आज हम आपको अपनी कुछ स्टोरी सुनते है , तब आपको अच्छी तरह से क्लियर हो जायेगा, हमारी study क्यों नहीं हो पाती है, या है किसी भी चीज म मन क्यों नहीं लगा पाते चाहे वह पढ़ाई हो या कोई और काम। • हमारा मन कैसे काम करता है? पहले ये जानों बिना किसी किताबी भाषा में। अच्छा आपने हमेशा ये नोटिस किया होगा कि आप जो चीज ज्यादा देखते, सुनते और बोलते या लिखते हो हमारे दिमाग म वो चीज ज्यादा होता है। एक example जैसे आप आज कोई सीरियल देखते हो आपको लगता एक और देख लेते हैं,ऐसी करके आप बहुत ज्यादा एपिसोड उस सीरियल के देख लेते हो क्योंकि उसमें आपको मज़ा आया क्यों ? क्योंकि उसमें एक सीरियल म आपको बहुत चीज एक साथ चिपका दिया । जैसे थ्रिल, action, कॉमेडी, ड्रामा, रोमांस जैसी चीज बस यही से समझ म आता है हमारे ब्रेन को भी ये सब एक साथ पसंद है।                                  हम क्या करते किसी भी चीज को पढ़ने बैठते है ,पर हम एक सीरियल या एपिसोड की तरह मज़ा चाहते हैं, जबकि ऐसा पॉसिबल नहीं, अगर हम...

2 कविता जो मां को खुश कर दे !

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1: शीर्षक: मां का मुस्कान // कविता  "माँ" के मुस्कान को लाने मे और साल भी बीत गए, पापा को सम्मान दिलाने में कि माँ - पापा भी बूढ़े हो गए आशा अब भी बाकि है। कि तेरी सांसों का कोई भरोसा नहीं मत देख "माँ" अब तू राह मे री, मैं भवसागर में फंसा हुआ कोशिश है, जल्दी आऊंगा तेरे सपनो को भी लाऊंगा, सब चिंताओ को त्याग दे "माँ" मेरे आने तक रुक जाना "माँ" 2.  शीर्षक:  चुप है, मां।  / / ये मेरा भी फेवरेट है !   "चुप है मां" (शीर्षक) चुप है मां, पर मन में भारी बोझ लिए, थकी आंखों में उम्मीदों की जोत लिए। झुकी कमर, कांपते हाथ, फिर भी रसोई में खड़ी, कहती है - "बेटा, सब ठीक है..." जैसे कुछ हुआ ही नहीं। घर में और भी हैं, जवान और स्वस्थ, पर नींद और आराम की दीवारें बहुत मजबूत हैं। कुछ लोग चैन की नींद में दिन बिताते हैं, और मां जलती है रोटियों के धुएं में अकेले। मैं देखता हूं, मन करता है कुछ कह दूं, पर डरता हूं - कहीं घर की शांति न बहक जाए। कहीं रिश्तों की दीवारें दरक न जाएं, कहीं मां फिर कह न दे "चुप रह बेटा, बिखर जाएगा घर..." मैं भी चाहता...

जीतने का पागलपन

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 जीतने का पागलपन:- जीतने का पागलपन किसमें नहीं होता हर इंसान एक दूसरे को पीछे करके आगे जाना चाहता है लेकिन इंसान क्या करें आज के इस भागदौड़ वाली जिंदगी में हर एक इंसान को अपनी जिम्मेदारी भी तो निभाना ही होती है और हर एक इंसान की बस एक ही ख्वाहिश है कि अगले इंसान को किसी तरह से पीछे करके अपने को आगे जाना है और आज की जिंदगी में बस यही चल रही है।                                                                    इसके बावजूद भी इंसान चाहे तो आगे बढ़ सकता है जिस प्रकार चाणक्य कहते हैं कि अभी कुछ नहीं बिगड़ा है उसी प्रकार से इंसान चाहे तो जब से चाहे जब शुरू कर सकता है इंसान का कभी किसी भी समय कुछ बिगड़ता नहीं इंसान चाहे तो बीती हुई समय को अपने कंट्रोल में ले करके अपने आप को बेहतर साबित कर सकता है चाहे वह कितना भी लेट ना हो गया इंसान को कभी भी हार नहीं मानना चाहिए आजकल की इस भागदौड़ वाली जिंदगी में हर एक इंसान में एक जज्ब...

Bheed me Saphalta Kuchh Vyaktiyo ko hee Kyon //WHY SHOULD SOME PEOPLE SUCCEED IN THE CROWD ?

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Bheed me Saphalta Kuchh Vyaktiyo ko hee Kyon.   WHY SHOULD SOME PEOPLE SUCCEED IN THE CROWD ?                                                                                                            Hamlog Aksr dekhte hai,har Candidate exam to dete hai, Lekin unme se kuchh logon ka hi selection ho paata hai.Yesha kyon??                                                                    •Yesha ham bahut se chigo me dekhte hai,jaise Running competition me Bahut se runner run karte hai,Magar unme se sirf three runner ko winner choose kiya jaata...

जो भी होता है,अच्छे के लिए होता है।

कहानी :अकबर और बीरबल की!!                                         एक समय की बात है जब अकबर और बीरबल शिकार पर जा रहे होते हैं  शिकार करते वक्त जब अकबर तलवार निकलता है तो गलती से उसका अंगुली कट जाता है और वह चीखने चिल्लाने लगता है तभी अकबर अपने सिपाहियों को कहता है, कि जाओ और जल्दी बंद को बुलाओ उसी वक्त बीरबल कहता है!                                                                                                    महाराज जो होता है ,अच्छे के लिए होता है तब अकबर कहता है,सिपाहियों पहले इस बीरबल को ले जाओ और इसे रात भर कोड़ी मारते रहना और सुबह फांसी दे देना कुछ दूर जाने के बाद अकबर देखता है ,कि आदिवासी लोग बलि चढ़ाने के लिए वहीं पर हूँ ...